UttarakhandGITag : उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान :- उत्तराखंड के पारंपरिक और विशिष्ट उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि प्रदेश के 25 नए उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) के लिए चिन्हित किया गया है। यह जानकारी उन्होंने सचिवालय में कृषि, पशुपालन, पर्यटन और उद्योग विभागों से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की समीक्षा बैठक के दौरान दी।
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मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू कर अधिक से अधिक लोगों को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उच्च स्तरीय बैठकों के कार्यवृत्त को उन्नति पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाए, ताकि योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सेब की अतिसघन बागवानी योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना को तय लक्ष्यों के अनुरूप समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। किसानों को अधिक प्रोत्साहन दिया जाए और उनसे संबंधित सभी देयकों का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए राज्य में कीवी उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया।मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड में शहद उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं।
‘हनी मिशन’ के तहत शहद उत्पादन को और अधिक प्रभावी ढंग से बढ़ाया जाए तथा राज्य में उत्पादित शहद का ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही बागवानी और मौन पालन के क्षेत्र में जिन राज्यों ने उल्लेखनीय प्रगति की है, उनके अध्ययन के लिए अधिकारियों और विशेषज्ञों की टीमों को भेजने के निर्देश दिए गए।
बैठक में जानकारी दी गई कि अब तक उत्तराखंड के 29 उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है, जिनमें से 18 कृषि एवं कृषि कल्याण से जुड़े हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य की 134 करोड़ रुपये की लागत वाली मोटा अनाज नीति के तहत मंडुवा, झंगोरा, रामदाना, कौणी और चीना को शामिल किया गया है।
पहले चरण में 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के 24 विकासखंडों और दूसरे चरण में 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के 44 विकासखंडों का चयन किया गया है। चालू वित्तीय वर्ष में पांच हजार मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 5,386 मीट्रिक टन मोटे अनाज की खरीद की जा चुकी है।मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 के अंतर्गत आगामी वर्ष में नौ हजार लोगों को लाभान्वित करने का लक्ष्य तय किया गया है, जिससे युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
बैठक में यह भी बताया गया कि जीआई टैग के लिए चिन्हित किए गए प्रमुख उत्पादों में पहाड़ी आलू, नींबू, कौसानी की चाय, नैनीताल-ज्योलिकोट का शहद, अल्मोड़ा की सिंगोडी मिठाई, काफल और हर्षिल की राजमा सहित कुल 25 उत्पाद शामिल हैं।
इन उत्पादों को जीआई टैग मिलने से स्थानीय किसानों, कारीगरों और उत्पादकों को आर्थिक रूप से बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और गणेश जोशी सहित प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव नितेश झा, दिलीप जावलकर, विनय शंकर पाण्डेय, एस.एन. पाण्डेय, वी. षणमुगम, धीराज गर्ब्याल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
