UttarakhandCensus : कब होगी उत्तराखंड में जनगणना – पढ़िए शेड्यूल :- भारत में होने वाली जनगणना 2027 की प्रक्रिया अब अगले महत्वपूर्ण पड़ाव में प्रवेश कर चुकी है. केंद्र सरकार ने जनसंख्या गणना (Population Enumeration) के दूसरे चरण के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है. खासतौर पर जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फबारी से प्रभावित पर्वतीय इलाकों के लिए अलग से समय-सीमा तय की गई है, ताकि मौसम संबंधी चुनौतियों के बीच भी गणना का काम सुचारु रूप से पूरा किया जा सके।
इसके साथ ही सरकार ने पहली बार नागरिकों को घर-घर सर्वे शुरू होने से पहले ऑनलाइन स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने यानी सेल्फ एन्युमेरेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई है. आइए जानते हैं जनगणना के दूसरे चरण का पूरा कार्यक्रम, इसकी प्रक्रिया और इसमें पूछी जाने वाली अहम जानकारियों के बारे में।
पहाड़ी और बर्फबारी वाले क्षेत्रों के लिए जारी हुआ विशेष शेड्यूल
गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय ने दूसरे चरण की जनसंख्या गणना के लिए विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है. मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के उन इलाकों को प्राथमिकता दी गई है, जहां सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण सामान्य जनगणना कराना कठिन हो जाता है।
सरकार के अनुसार इन अधिसूचित क्षेत्रों में 1 सितंबर 2026 से 30 सितंबर 2026 तक घर-घर जाकर जनसंख्या की गणना की जाएगी. इस दौरान अधिकारी प्रत्येक परिवार से आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे और निर्धारित प्रारूप में उसका रिकॉर्ड तैयार करेंगे।
1 से 5 अक्टूबर तक चलेगा रिवीजन राउंड
मुख्य जनगणना प्रक्रिया पूरी होने के बाद आंकड़ों की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए 1 अक्टूबर से 5 अक्टूबर 2026 तक विशेष रिवीजन राउंड आयोजित किया जाएगा. इस दौरान यदि किसी परिवार या व्यक्ति का विवरण छूट गया हो या किसी जानकारी में त्रुटि पाई जाती है, तो उसे संशोधित किया जाएगा।
सरकार ने इन क्षेत्रों के लिए 1 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक रेफरेंस डेट घोषित किया है. यानी इसी तारीख के आधार पर संबंधित क्षेत्रों की जनसंख्या और अन्य सामाजिक आंकड़ों का अंतिम रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
17 अगस्त से शुरू होगी सेल्फ एन्युमेरेशन सुविधा
इस बार की जनगणना में सरकार ने डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देते हुए नागरिकों को सेल्फ एन्युमेरेशन का विकल्प भी दिया है. इसके तहत संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के निवासी 17 अगस्त 2026 से 31 अगस्त 2026 के बीच ऑनलाइन अपनी और अपने परिवार की जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे।
इस सुविधा का उद्देश्य घर-घर सर्वे से पहले डेटा संग्रह को आसान बनाना और नागरिकों को प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का अवसर देना है. इससे जनगणना अधिकारियों का काम भी सरल होगा और जानकारी अधिक सटीक रूप से दर्ज की जा सकेगी।
आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई पूरी जानकारी
जनगणना विभाग ने उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के अधिसूचित पर्वतीय क्षेत्रों का विस्तृत विवरण अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया है. यहां नागरिक यह देख सकते हैं कि उनका क्षेत्र इस विशेष कार्यक्रम में शामिल है या नहीं और उन्हें सेल्फ एन्युमेरेशन की सुविधा मिलेगी या नहीं।
सरकार का कहना है कि ऑनलाइन सुविधा और निर्धारित कार्यक्रम के जरिए जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाया जाएगा।
जनसंख्या गणना के दौरान कौन-कौन सी जानकारी ली जाएगी?
जनसंख्या गणना जनगणना का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान प्रत्येक व्यक्ति और परिवार का विस्तृत सामाजिक एवं व्यक्तिगत रिकॉर्ड तैयार किया जाता है. अधिकारियों द्वारा घर-घर जाकर परिवार के प्रत्येक सदस्य से जुड़ी आवश्यक जानकारियां दर्ज की जाएंगी।
इस प्रक्रिया में व्यक्ति का नाम, आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, मातृभाषा, शिक्षा का स्तर, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंध, रोजगार की स्थिति सहित कई अन्य सामाजिक और आर्थिक जानकारियां शामिल होंगी. इन आंकड़ों का उपयोग भविष्य की सरकारी योजनाओं, संसाधनों के वितरण और विकास संबंधी नीतियों को तैयार करने में किया जाएगा।
