ITRDeadline31August2026 : 31 अगस्त से पहले फाइल करें ITR…… वरना :- घड़ी की सुइयां तेजी से भाग रही हैं और अगर आपने थोड़ी सी भी ढील दी, तो 31 अगस्त का दिन आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है. जी हां, अगर आप टैक्सपेयर की श्रेणी में आते हैं, तो 31 अगस्त 2026 फाइनेंस से जुड़े एक सबसे महत्वपूर्ण काम की आखिरी तारीख (Deadline) है.अगर आपने यह काम समय रहते पूरा नहीं किया, तो भारी पेनल्टी के साथ-साथ आपको इनकम टैक्स विभाग का नोटिस भी झेलना पड़ सकता है. आइए समझते हैं कि आपको तुरंत क्या करना है।
वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए बिना किसी लेट फीस के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 है. अक्सर लोग सोचते हैं कि अभी तो बहुत समय है, लेकिन आखिरी दिनों में आयकर विभाग का पोर्टल ओवरलोड होने के कारण सुस्त पड़ जाता है. इसलिए अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना अपना ITR तुरंत फाइल करें।
एक्सपर्ट्स ने कहा कि अगर आप कंटेंट क्रिएटर हैं, जैसे कि Youtube या Instagram जैसे प्लैटफॉर्म से कमाई करते हैं, या फ्रीलांस का काम करते हैं या बिजनेस मैन हैं तो आपके लिए आईटीआर की 31 अगस्त की सीमा है. अगर आप 31 अगस्त की समयसीमा चूक जाते हैं, तो आपको विलेटेड रिटर्न (Belated ITR) दाखिल करना होगा, जिसके लिए आपको आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत लेट फीस देनी होगी।
5 लाख से अधिक आय वाले टैक्सपेयर्स: 31 अगस्त के बाद ITR भरने पर 5000 रुपये की लेट फीस देनी होगी।
5 लाख से कम आय वाले टैक्सपेयर्स: अगर आपकी सालाना टैक्स योग्य आय 5 लाख से कम है, तो पेनल्टी राशि अधिकतम 1000 होगी. अगर आपका कोई टैक्स बकाया है, तो 31 अगस्त के बाद से प्रति महीने 1% की दर से अतिरिक्त ब्याज भी जुड़ना शुरू हो जाएगा।
सिर्फ जुर्माना ही नहीं, होंगे ये 3 बड़े नुकसान
टैक्स रिफंड में देरी: अगर आपका TDS कटा हुआ है और आप रिफंड का इंतजार कर रहे हैं, तो देर से रिटर्न दाखिल करने पर रिफंड आने में महीनों का समय लग सकता है।
घाटे को कैरी फॉरवर्ड करने का मौका खत्म: शेयर बाजार, F&O या बिजनेस में हुए नुकसान (Losses) को आप अगले सालों के लिए एडजस्ट (Set-off/Carry forward) नहीं कर पाएंगे।
लोन और वीजा में रुकावट: होम लोन, कार लोन या विदेश यात्रा के वीजा के लिए पिछले 3 सालों की ITR कॉपी मांगी जाती है, लेट फाइलिंग से आपकी क्रेडिट प्रोफाइल पर असर पड़ता है।
ITR दाखिल करते समय ध्यान रखें ये 3 बातें
AIS और TIS जरूर चेक करें: केवल फॉर्म-16 पर निर्भर न रहें. अपने एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और TIS से ब्याज, डिविडेंड और शेयर ट्रेडिंग की जानकारी मैच कर लें।
