RBIFraudCompensation : बड़ा फैसला! अब ठगी हुई तो मिलेगा मुआवजा :- आज वो दौर है जब करीब-करीब हर एक शख्स के हाथ में मोबाइल फोन है. लोग खूब ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं. एक तरह से कहा जाए तो लोगों की दुनिया मोबाइल फोन पर ही सिमटती जा रही है।
आज वो दौर है जब करीब-करीब हर एक शख्स के हाथ में मोबाइल फोन है. लोग खूब ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं. एक तरह से कहा जाए तो लोगों की दुनिया मोबाइल फोन पर ही सिमटती जा रही है और जब उंगलियां तेजी से स्क्रीन पर स्क्रॉल करती हैं तो इसी बीच लुभाववने ऑफर्स भी आते हैं जो हमें बेहद ललचाते भी हैं और यहीं जरा सी चूक होती नहीं कि मोबाइल के ई नेटवर्क लाल की जाल में आप हम फंस जाते हैं।
जाहिर है कि हाल के वर्षों में देश भर में बैंकिंग फ्रॉड के मामलों में जबरदस्त तेजी आई. लेकिन अब साइबर फ्रॉड के शिकार ग्राहकों के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया थोड़ा मरम लगाने का उपाय कर रही है और साइबर ठगी को रोकने की कोशिश भी की जा रही है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने साइबर फ्रॉड के शिकार ग्राहकों को राहत देने के लिए एक नया ड्राफ्ट जारी किया है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 से, 50,000 रुपये तक के डिजिटल फ्रॉड पर ग्राहकों को 85% या अधिकतम ₹25,000 तक का मुआवजा मिल सकता है। यह 5 दिनों के भीतर बैंक में शिकायत करने पर मान्य होगा और इसमें ‘MuleHunter’ जैसे AI टूल्स से जाली खाते फ्रीज करने की योजना भी शामिल है।
आरबीआई के नए नियमों की मुख्य बातें (ड्राफ्ट प्रस्ताव)
मुआवजा सीमा: 50,000 रुपये तक के फ्रॉड पर, नुकसान का 85% या 25,000 रुपये तक का मुआवजा।
शिकायत की अवधि: फ्रॉड होने के 5 दिनों के भीतर बैंक और 1930 नंबर पर सूचित करना जरूरी है।
लागू होने की तिथि: प्रस्तावित नियम 1 जुलाई 2026 से लागू हो सकते हैं।
आरबीआई मशीन लर्निंग आधारित टूल का उपयोग करके जाली बैंक खातों को पैसा निकलने से पहले ही फ्रीज कर देगा।
SMS अलर्ट: ₹500 से अधिक के सभी ट्रांजैक्शन पर तत्काल SMS अलर्ट अनिवार्य होगा।
फ्रॉड होने पर क्या करें?
तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें और ऑनलाइन Cyber Crime Portal पर शिकायत दर्ज करें।
24 घंटे के भीतर अपने बैंक को सूचित करें।
RBI ने इस ड्राफ्ट पर 6 अप्रैल, 2026 तक जनता से सुझाव मांगे हैं।
