HerbalHoliColors : हर्बल रंगों से होली को खास बनाएगी दून की महिलाएं :- उत्तराखंड में सरकार की योजनाओं से महिलाएं सिर्फ स्वरोजगार की तरफ ही आगे नहीं बढ़ रही है। बल्कि वे अपने त्योहारों में भी आर्थिकी मजबूत करने के साथ ही अपना खास योगदान दे रही हैं।
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इन दिनों हर जगह रंगों के त्योहार होली की हर तरफ धूम है। हर कोई रंगों से खुशियां बिखेरने को तैयार है। इसी क्रम में देहरादून की ग्रामीण महिलाएं अपने खास हर्बल रंगों से होली को खास बनाने में जुटी हैं। जो कि घर-घर खुशियों की बहार बिखेरने को तैयार है। समूह की महिलाओं ने 2.5 कुंतल प्राकृतिक रंग अब तक तैयार किया है। जो कि होली बाजार में रौनक बढ़ा रही है।
ये हर्बल रंग रायपुर-सहसपुर में तैयार हो रहे हैं। जो कि वोकल फॉर लोकल’ का मैसेज भी दे रहे हैं। रंगों के पावन पर्व होली की तैयारियों को लेकर स्थानीय बाजारों में ग्रामीण समूहों की महिलाओं द्वारा निर्मित हर्बल रंग अपनी विशिष्ट छटा बिखेर रहे हैं। ये रंग न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं, बल्कि जन-जीवन में प्रसन्नता के नवीन रंग भी घोल रहे हैं।
देहरादून के विकासखंड सहसपुर एवं रायपुर में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएँ सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल होली के उद्देश्य से प्राकृतिक रंगों का निर्माण कर उन्हें स्थानीय बाजारों में विक्रय कर रही हैं। इस वर्ष समूहों द्वारा तैयार किए गए ये प्राकृतिक रंग लोगों के घरों में हर्ष और उल्लास फैलाने को तत्पर हैं।
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सहसपुर ब्लॉक के आस्था क्लस्टर तथा रायपुर ब्लॉक के नई दिशा एवं दिव्य ज्योति क्लस्टर से संबद्ध लगभग 30 महिलाओं ने टेसू और गुलाब के पुष्प, हल्दी, चंदन, पालक के पत्ते, चुकंदर तथा मेहंदी जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से हर्बल रंग तैयार किए हैं। ये रंग त्वचा के लिए पूर्णतः सुरक्षित तथा पर्यावरण के अनुकूल हैं।
रासायनिक रंगों से होने वाले दुष्प्रभावों को देखते हुए इन हर्बल एवं प्राकृतिक रंगों की बाजार में पर्याप्त मांग है, जिससे महिलाओं के परिवारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है।
मुख्यमंत्री द्वारा संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से ये महिलाएँ न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि होली के अवसर पर मातृशक्ति के सशक्त स्वरूप का प्रेरणादायी उदाहरण भी प्रस्तुत कर रही हैं।
सहसपुर ब्लॉक की समूह सदस्य मीना ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं ने सुरक्षित एवं पर्यावरण-संरक्षण को ध्यान में रखकर प्राकृतिक होली के रंग तैयार किए हैं, जिनकी स्थानीय बाजार में अच्छी बिक्री हो रही है।
उन्होंने कहा कि आजीविका मिशन से जुड़ने पर महिलाओं को ऐसा मंच प्राप्त होता है, जहाँ वे अपने कौशल का प्रदर्शन कर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर सकती हैं।
