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Home » Kashi : त्रिशूल पर टिकी काशी, जहां आज भी हैं शिव
उत्तर प्रदेश

Kashi : त्रिशूल पर टिकी काशी, जहां आज भी हैं शिव

Why does Kashi not sink even during a cataclysm? The story of Varanasi.
Narad PostBy Narad PostNovember 22, 2025No Comments3 Mins Read
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Kashi
Kashi त्रिशूल पर टिकी काशी, जहां आज भी हैं शिव
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Kashi :  त्रिशूल पर टिकी काशी, जहां आज भी हैं शिव :-  वाराणसी, जिसे काशी, बनारस नाम से भी जाना जाता है, भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में गंगा नदी के तट पर बसा एक ऐसा पवित्र शहर है, जो समय की सीमाओं को लांघ चुका है। यह हिंदू धर्म का हृदय स्थल है, जहां मृत्यु भी मोक्ष का द्वार बन जाती है। यहाँ पर संकरी गलियों में गूंजती घंटियाँ, घाटों पर बहती गंगा की लहरें, शाम की आरती की रोशनी और सुबह के सूर्योदय की किरणें, सब मिलकर एक ऐसा दृश्य बनाते हैं जो सीधे आत्मा को छूती है।

प्रलय में भी क्यों नहीं डूबती काशी ? Varanasi ki Kahani

वाराणसी शहर का नाम दो नदियों, वरुणा (उत्तर में) और असी (दक्षिण में) के बीच बसे होने के कारण इसका नाम “वाराणसी” पड़ा, जिसका अर्थ है वरुणा और असि के बीच की ‘ज़मीन’। काशी को भगवान शिव की नगरी माना गया है। यहाँ मंदिरों की घंटियां निरंतर बजती रहती हैं। यह न केवल धार्मिक महत्व का केंद्र है, बल्कि संस्कृति, कला, संगीत और शिक्षा का भी जीता-जागता का स्रोत है (जैसे कि बनारसी साड़ी, संगीत-शहनाई) आदि। आईये जानतें हैं वाराणसी (काशी) की कथा..

खाली पेट पपीता खाने के फायदे

वाराणसी की उत्पत्ति भगवान शिव से जुड़ी है। काशी शिव की सबसे प्रिय नगरी है। यहां शिव स्वयं काशी विश्वनाथ के रूप में विराजमान हैं। वाराणसी (काशी) की यह प्रसिद्ध कथा मुख्य रूप से स्कंद पुराण के काशी खंड में वर्णित है। पुराणों में कहा गया है कि “काशीं विश्वनाथस्य हृदयं” (काशी विश्वनाथ का हृदय है)। यह कथा शहर की पवित्रता, अमरता और भगवान शिव के अलौकिक प्रेम को दर्शाती है। इसे अविमुक्त क्षेत्र की उत्पत्ति की कथा भी कहा जाता है।

पौराणिक कथानुसार, सृष्टि के प्रारंभ में भगवान शिव ने यहां तपस्या की। इस स्थान पर शिव ने स्वयं निवास किया। कहा जाता है कि सृष्टि के आदि काल में, जब ब्रह्मा ने पुरे विश्व की रचना की, तब भगवान शिव ने एक विशेष क्षेत्र की कल्पना की, जहां आत्माएं मोक्ष प्राप्त कर सकें। तब भगवान शिव ने पार्वती से कहा: “हे पार्वती! मैं एक ऐसी नगरी बसाऊंगा जो कभी नष्ट न हो, जहां मृत्यु भी मुक्ति का द्वार बने।”

सरसों का तेल और लहसुन के फायदे

⁠शिव ने अपना त्रिशूल उठाया और उस पर एक दिव्य अविमुक्त क्षेत्र को स्थापित किया, यह क्षेत्र था काशी (वाराणसी)। शिव ने इसे अपने त्रिशूल के मध्य भाग पर टिका दिया, ताकि प्रलय (विश्व विनाश) के समय भी यह सुरक्षित रहे।

प्रलय के समय, जब समस्त विश्व जलमग्न हो जाता है, तब भी शिव अपने त्रिशूल पर काशी को उठा लेते हैं।यहां गंगा नदी का प्रवाह उत्तरवाहिनी है, जो इसे और अधिक पवित्र बनाता है। मान्यता है कि इस भूमि पर मृत्यु प्राप्त करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए, वाराणसी को ‘मोक्ष नगरी’ भी कहा जाता है।

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