YagyaChikitsa : 50 से ज्यादा रोग दूर कर सकती है यज्ञ चिकित्सा :- व्यक्ति का लाइफस्टाइल ठीक ना हो तो शरीर को रोगों का घर बनते देर नहीं लगती. छोटी से बड़ी ऐसी कितनी ही स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हैं जो आयदिन परेशान करती हैं जिनके लिए व्यक्ति को दवाएं लेनी पड़ती हैं. लेकिन, हर समस्या को दवाओं से ट्रीट किया जाए या कहें हर छोटी-बड़ी समस्या में तुरंत दवा खाई जाए तो इन दवाओं का दुष्प्रभाव होते भी देर नहीं लगती है और खुद डॉक्टर यह सलाह देते हैं कि बिना प्रिस्क्रिप्शन के कोई दवा नहीं लेनी चाहिए।
वहीं, आयुर्वेद में कहा जाता है कि व्यक्ति को दवाओं पर निर्भरता कम करके अपनी जीवनशैली और खानपान में सुधार करना चाहिए और आयुर्वेदिक नुस्खे आजमाने चाहिए जो समस्या को तो दूर करते ही हैं, साथ ही शरीर को अनेक फायदे भी देते हैं।
यहां एक ऐसी ही प्राचीन भारतीय वैदिक उपचार पद्धति का जिक्र किया जा रहा है जिसमें आयुर्वेदिक औषधियों का इस्तेमाल किया जाता है और 50 से ज्यादा बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है. यह उपचार पद्धति है यज्ञ चिकित्सा (Yagya Chikitsa). पतंजलि वेलनेस सेंटर उन आयुर्वेदिक संस्थानों में से एक है जहां यह यज्ञ चिकित्सा दी जाती है. यहां जानिए यज्ञ चिकित्सा क्या होती है, यह किन-किन बीमारियों का इलाज करती है और इसमें कौन सी आयुर्वेदिक औषधियां इस्तेमाल में लाई जाती हैं।
क्या है यज्ञ चिकित्सा
यज्ञ चिकित्सा एक प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति है. इसमें होता यह है कि एक हवन कुंड तैयार किया जाता है जिसमें यज्ञ की अग्नि में विशिष्ट जड़ी-बूटियां और औषधियां डाली जाती हैं और साथ-साथ मंत्रोच्चार किया जाता है।
इससे निकलने वाला धुआं रोगों के उपचार में मदद करता है. इससे वातावरण शुद्ध होता है और खासतौर से वायुजनित बीमारियों से छुटकारा पाने में मदद मिलती है. पतंजलि योगपीठ मरीजों के इलाज के लिए यज्ञ चिकित्सा पद्धति का इस्तेमाल करता है. यहां मेधा इष्टि, कफ इष्टि, मधु इष्टि और चम्रि या कर्कटेष्टि समेत कई यज्ञ किए जाते हैं।
यज्ञ चिकित्सा में अनेक रोगों में लाभ मिलता है. इन रोगों में 70 से ज्यादा रोग शामिल हैं –
एमड, एमएनडी आदि ओटोइम्यून डिजीज, वंशानुगत डिजीज
तनाव
अनिद्रा
सिरदर्द
स्मृतिदौर्बल्य
मेंटल अनस्टेबिलिटी
पैरालाइसिस
पारकिंसन,
मस्तिष्क संबंधी अन्य रोग
एसिडिटी
अधिक गर्मी
अधिक पसीना
शरीर से दुर्गंध आना
त्वचा पर जलन
आंखों की जलन
छाती में जलन
अधिक कील-मुहांसे
पित्तज रोग
गठिया
जोड़ों का दर्द
जकड़न
सर्वाइकल
सायटिका
अन्य वातज रोग
दमा
श्वास की दिक्कतें
कास
स्वरभेद
नजला
साइनस
खांसी जैसे कफज रोग
कैंसर
गांठ रोग
अज्ञात बीमारी
प्रारब्धदोष तथा संस्कार जनित दोष
हार्टबीट संबंधी रोग
ब्लड प्रेशर
कॉलेस्ट्रोल
ट्राइग्लाइसेराइड्स
ह्रदय संबंधी रोग
टाइप 1 डायबिटीज
टाइप 2 डायबिटीज
दाद
खाज
खुजली
स्किन एलर्जी
सफेद दाग
एक्जिमा
सोरायसिस
अन्य त्वचा रोग
नि:संतानता
बन्ध्यत्व तथा प्रजनन संबंधी विकार
स्पर्म एंव ओवम के पोषण हेतु
किडनी रोग
लिवर की दिक्कतें
कब्ज
कोलाइटिस
रोगानुसार कौन सी यज्ञ चिकित्सा दी जाती है
प्राणेष्टि सामग्री – गुग्गुल, घी
एमड, एमएनडी आदि ओटोइम्यून डिजीज, वंशानुगत डिजीज
मेधेष्टि सामग्री – गुग्गुल, घी
तनाव, अनिद्रा, सिरदर्द, स्मृतिदौर्बल्य, मेंटल अनस्टेबिलिटी, पैरालाइसिस, पारकिंसन, मस्तिष्क संबंधी अन्य रोग
पित्तेष्टि सामग्री – गुग्गुल, घी
एसिडिटी, अधिक गर्मी, अधिक पसीना, शरीर से दुर्गंध आना, त्वचा पर जलन, आंखों की जलन, छाती में जलन, अधिक कील-मुहांसे, पित्तज रोग
वातेष्टि सामग्री – गुग्गुल, तिल तेल
गठिया, जोड़ों का दर्द, जकड़न, सर्वाइकल,
सायटिका, अन्य वातज रोग
कफेष्टि सामग्री – गुग्गुल, कर्पूर
दमा, श्वास की दिक्कतें, कास, स्वरभेद, नजला, साइनस, खांसी जैसे कफज रोग
कर्कटेष्टि सामग्री- गुग्गुल, घी
कैंसर तथा गांठ रोग हेतु
प्राब्धेष्टि सामग्री – गुग्गुल, दिव्येष्टि, घी
अज्ञात बीमारी, प्रारब्धदोष तथा संस्कार जनित दोष
ह्रदयेष्टि – गुग्गुल, घी
हार्टबीट संबंधी रोग, ब्लड प्रेशर, कॉलेस्ट्रोल, ट्राइग्लाइसेराइड्स, ह्रदय संबंधी रोग
मधु-इष्टि – गुग्गुल, घी
टाइप-1 डायबिटीज, टाइप 2 डायबिटीज
चर्मेष्टि – गुग्गुल, घी
दाद, खाज, खुजली, स्किन एलर्जी, सफेद दाग, एक्जिमा, सोरायसिस, अन्य त्वचा रोग
सन्तीष्टि सामग्री – गुग्गुल, घी
नि:संतानता, बन्ध्यत्व तथा प्रजनन संबंधी विकार, स्पर्म एंव ओवम के पोषण हेतु.
यज्ञ चिकित्सा में क्या-क्या होता है
यज्ञ चिकित्सा में अग्निकुंड बनाया जाता है जिसमें यज्ञ की सामग्री डालते हुए मंत्रोच्चारण किया जाता है. कहा जाता है संस्कृत वर्णमाला में कुछ विशिष्ट और शक्तिशाली कंपन शक्तियां होती हैं जो उच्चारण के समय सामंजस्यपूर्ण तरंग पैटर्न बनाती हैं. इस यज्ञ में जिन चीजों का इस्तेमाल होता है उनसे पर्यावरण में मौजूद हानिकारक कण नष्ट होते हैं. इस सामग्री के कारण निकलने वाला धुआं बीमारियों, अस्वस्थता और शारीरिक कष्टों से मुक्ति दिलाने में लाभकारी साबित होता है।
