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Home » E20PetrolVsE10 : जान लें! E10, E20 और E85 पेट्रोल में क्या है फर्क ?
देश

E20PetrolVsE10 : जान लें! E10, E20 और E85 पेट्रोल में क्या है फर्क ?

India depends on other countries for petrol.
Narad PostBy Narad PostJuly 14, 2026No Comments4 Mins Read
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E20PetrolVsE10
E20PetrolVsE10 : जान लें! E10, E20 और E85 पेट्रोल में क्या है फर्क ?
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E20PetrolVsE10 : जान लें! E10, E20 और E85 पेट्रोल में क्या है फर्क ?  :-  इस वक्त देश में E-20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर बहस छिड़ी हुई है. सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक, पेट्रोल पंप से लेकर मैकेनिक की दुकानों तक, हर जगह लोग E-20 की चर्चा हो रही है।

कुछ लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से गाड़ियां खराब हो रही हैं? क्या इथेनॉल की वजह से गाड़ियों के इंजन फेल हो रहे हैं? क्या इथेनॉल से गाड़ियों में जंग लग रही है. पार्ट-पुर्जे बेकार हो रहे हैं? क्या इथेनॉल की वजह से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है?

कई संशय हैं. कुल मिलाकर भ्रम की स्थिति है. ऐसे में आम आदमी के संशय को दूर करना जरूरी है. लेकिन इससे पहले E-20 को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय का ताजा बयान आपको देखना चाहिए. मंत्रालय ने ये साफ कर दिया है कि E-20 पेट्रोल ही देश का स्टैंडर्ड यानी मानक पेट्रोल बना रहेगा. सरकार पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट बंद या कम नहीं करेगी।

मंत्रालय ने इस मांग को खारिज कर दिया है जिसमें ये कहा जा रहा था कि पेट्रोल पंपों पर E-0 यानी शुद्ध पेट्रोल, E-10 और E-20 जैसे विकल्प होने चाहिए. सरकार का कहना है कि ऐसा करना बहुत बड़ी चुनौती होगी. मंत्रालय ने ये भी कहा है कि सोशल मीडिया पर E-20 को लेकर अफवाह फैलाई जा रही है. गाड़ियों के पार्ट्स खराब होने के दावे वैज्ञानिक सबूतों की कसौटी पर खरा नहीं उतरते हैं।

E-20 पेट्रोल को लेकर सरकार और कार निर्माता कंपनियों ने अपना पक्ष साफ कर दिया. भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली ARAI यानी ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने 2021 में अपनी ये रिसर्च पब्लिश की थी. ARAI की इस स्टडी में पाया गया कि जो वाहन केवल E10 यानी 10% इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के लिए बने हैं।

अगर उनमें लगातार E20 पेट्रोल का इस्तेमाल किया जाए, तो उनके फ्यूल सिस्टम के रबर पार्ट्स कमजोर होने लगते हैं. इससे गाड़ी के पाइप , गास्केट, सील और O-रिंग्स जैसे रबर से बने हिस्सों की गुणवत्ता में गिरावट देखी गई है. अध्ययन में साफ तौर पर कहा गया है कि लंबे समय में इन पार्ट्स को बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि वाहन के लोहे या धातु वाले पार्ट्स पर इस नए ईंधन का कोई बुरा असर नहीं देखा गया है. साथ ही, E10 कारों में E20 डालने पर भी प्रदूषण का स्तर तय सरकारी सीमाओं के भीतर ही रहा. ARAI की रिपोर्ट में ये पाया गया है कि E-10 पेट्रोल के लिए बनी गाड़ियों में अगर E-20 पेट्रोल डाला जाए तो माइलेज 2 से 6 प्रतिशत तक घट जाएगा।

भारत पेट्रोल के लिए दूसरे देशों पर निर्भर

भारत पेट्रोल के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है. लेकिन इथेनॉल के मिश्रण की वजह से भारत ने 316 लाख मिट्रिक टन कच्चे तेल की बचत की है. ईरान युद्ध की वजह से पैदा तेल संकट के बीच ये आंकड़ा काफी मायने रखता है. इथेनॉल मिश्रण की वजह से तेल के लिए निर्भरता तो कम होती ही है।

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़ता है. इथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से भारत को करीब 2 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है. इथेनॉल के उत्पादन के लिए भारत सरकार ने किसानों से जो गन्ना और मक्का खरीदा उससे भारत के अन्नदाताओं को एक लाख साठ हजार करोड़ रुपये का फायदा हुआ. पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से प्रदूषण भी कम हुआ. 952 लाख मेट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन हुआ।

साल 2001 में इसे प्रयोग के तौर पर ब्लेंड करने के कार्यक्रम की शुरुआत हुई. इसकी औपचारिक घोषणा 2004 में की गई. 2006 तक कई राज्यों में E5 यानी 5% इथेनॉल मिश्रण को लागू किया गया था. इसकी जानकारी यूपीए सरकार ने 2013 में आधिकारिक तौर पर दी. तब 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय किया गया था. लेकिन 2014 तक यह 1.5% पर ही रहा. सरकार ने 2018 में जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति की शुरुआत की. इथेनॉल पर जीएसटी 18% से घटा कर 5% किया गया. तेल कंपनियों के साथ तेल संयंत्र तैयार किए गए।

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