SaveTreesUttarakhand : ऋषिकेश 7 मोड़ पर भारी विरोध के बावजूद पेड़ों का कटान लगातार जारी :- ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग को चौड़ा करने के नाम पर पर्यावरण को उजाड़ने की तैयारी के खिलाफ देवभूमि में विरोध के सुर तेज हो गए हैं। परवादून जिला कांग्रेस कमेटी ने विभिन्न सामाजिक और पर्यावरण संरक्षण संगठनों के साथ मिलकर ‘सात मोड़’ पर 3,000 से अधिक हरे-भरे पेड़ों के प्रस्तावित कटान के विरोध में एक विशाल और शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार से अंधाधुंध कटान पर तुरंत रोक लगाने और विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की पुरजोर मांग की।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे परवादून जिला कांग्रेस अध्यक्ष मोहित उनियाल ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा की “विकास के नाम पर हजारों साल पुराने और जीवन देने वाले हरे-भरे पेड़ों की बलि देना उत्तराखंड की आत्मा और हमारी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ सरासर अन्याय है।
कांग्रेस इस जनविरोधी फैसले के खिलाफ और पर्यावरण को बचाने के लिए जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। यह संघर्ष पेड़ों को बचाने तक जारी रहेगा। जिला महासचिव राहुल सैनी ने चेताया कि पर्यावरण की अनदेखी कर तैयार की गई योजनाएं राज्य के लिए भविष्य में आपदा का कारण बनेंगी।
डोईवाला कांग्रेस के नगर अध्यक्ष करतार नेगी ने स्थानीय जनता की नाराजगी को बयां करते हुए सरकार को सीधे शब्दों में चेतावनी दी और कहा कि “स्थानीय जनता की भावनाओं और पर्यावरण की चिंताओं को ताक पर रखकर किया जाने वाला कोई भी अंधाधुंध कटान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अगर सरकार ने इस विनाशकारी निर्णय पर तुरंत पुनर्विचार नहीं किया, तो सभी सामाजिक संगठनों और जनसहभागिता के साथ इस आंदोलन को और अधिक उग्र व व्यापक बनाया जाएगा।
”प्रदर्शन के अंत में सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं, पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक सुर में देवभूमि के जंगलों की रक्षा करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए अपना संघर्ष निरंतर जारी रखने का सामूहिक संकल्प लिया।
उत्तराखंड की असली पहचान यहां के घने जंगल, साफ हवा और समृद्ध पर्यावरण से है। यदि विकास योजनाओं में पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों पर विचार नहीं किया गया, तो इसका भारी खामियाजा हमारी आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।
ऐसे में सरकार को सड़क चौड़ीकरण के लिए ऐसे तकनीकी विकल्प तलाशने चाहिए जिससे पेड़ों को न्यूनतम नुकसान पहुंचे।
