AntiPaperLeakBill2026 : New Anti Paper Leak Bill, जानिए क्या-क्या बदला :- देशभर में NEET पेपर लीक विवाद और छात्रों के बड़े आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा कदम उठाया है। लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश कर दिया गया है।
अगर यह बिल कानून बनता है तो पेपर लीक करने वालों के लिए सजा पहले से कहीं ज्यादा कड़ी होगी।सिर्फ जेल ही नहीं 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना भी देना पड़ सकता है।
इतना ही नहीं, जांच और ट्रायल की समय सीमा भी तय कर दी गई है ताकि सालों तक केस लटकने की नौबत न आए। यह बिल ऐसे समय आया है जब NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्र आंदोलन हुआ, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया और सरकार ने परीक्षा सुधार का रोडमैप तैयार करने की घोषणा की।
नया एंटी पेपर लीक बिल क्या है?
सरकार ने लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। इसे प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में रखा।
सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी परीक्षाओं में पेपर लीक और दूसरे फर्जीवाड़े सामने आए। इससे छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ। नया बिल इसी समस्या को रोकने के लिए तैयार किया गया है।
अब कितनी मिलेगी सजा और जुर्माना? पुराने और नए नियमों का अंतर
नए बिल में सजा पहले के मुकाबले काफी बढ़ा दी गई है। अगर कोई व्यक्ति पेपर लीक या परीक्षा में बड़े स्तर पर गड़बड़ी करने का दोषी पाया जाता है तो उसे कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक जेल और ₹50 लाख तक जुर्माना हो सकता है।अगर मामला किसी संगठित गिरोह या बड़े नेटवर्क से जुड़ा हुआ पाया जाता है तो सजा और सख्त होगी।
ऐसे मामलों में कम से कम 7 साल की जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।2024 में बने पुराने कानून में साधारण मामलों के लिए 3 से 5 साल की जेल और सिंडिकेट के लिए 5 से 10 साल की जेल के साथ 1 करोड़ रुपये के न्यूनतम जुर्माने का नियम था।
2 महीने में जांच और 3 महीने में फैसला: बनेगी फास्ट ट्रैक कोर्ट
मामलों को सालों-साल लटकाने के बजाय अब बहुत तेज न्याय की व्यवस्था की गई है। नए कानून के तहत पुलिस या जांच एजेंसी को हर हाल में 2 महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करनी होगी।
सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को सत्र न्यायालयों (Courts of Session) को स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट में बदलने का अधिकार दे दिया गया है।
इन फास्ट-ट्रैक अदालतों में केस की सुनवाई रोजाना (Day-to-day) के आधार पर होगी। चार्जशीट दाखिल होने के ठीक 3 महीने यानी 90 दिनों के भीतर जज को अपना फैसला सुनाना पड़ेगा। सरकार जरूरत पड़ने पर पेपर लीक के मामलों की गहन जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) बनाने के आदेश दे सकती है।
