PlasticNotesIndia : पायलट प्रोजेक्ट के तहत छपेंगे 2 अरब पॉलीमर नोट :- भारत में करेंसी व्यवस्था एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है. आने वाले समय में लोगों की जेब में कागज के बजाय प्लास्टिक यानी पॉलीमर से बने नोट दिखाई दे सकते हैं. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने संकेत दिए हैं कि यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो अगले वित्त वर्ष की शुरुआत से 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोट बाजार में उतारे जा सकते हैं. फिलहाल यह एक परीक्षण प्रक्रिया होगी और इसका मकसद भारतीय परिस्थितियों में इन नोटों की उपयोगिता और प्रभाव का आकलन करना है।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत छपेंगे 2 अरब पॉलीमर नोट
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद बताया कि केंद्र सरकार ने फील्ड ट्रायल के लिए कुल 2 अरब पॉलीमर बैंक नोट छापने की मंजूरी दी है. इनमें 1 अरब 10 रुपये और 1 अरब 20 रुपये के नोट शामिल होंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल कागजी नोटों को पूरी तरह बंद करने की कोई योजना नहीं है. शुरुआती चरण में दोनों तरह के नोट समानांतर रूप से चलन में रहेंगे और ट्रायल के नतीजों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
क्यों जरूरी समझे जा रहे हैं प्लास्टिक नोट ?
आरबीआई के मुताबिक कम मूल्य वाले नोट सबसे अधिक इस्तेमाल होते हैं और जल्दी खराब भी हो जाते हैं. पॉलीमर नोट कागजी नोटों की तुलना में कई गुना अधिक टिकाऊ होते हैं, इसलिए इन्हें लंबे समय तक बिना खराब हुए इस्तेमाल किया जा सकता है. दुनिया के कई देशों में पिछले तीन दशकों से ऐसे नोट सफलतापूर्वक प्रचलन में हैं. भारत में भी इन्हें मौसम, नमी, गर्मी और मौजूदा बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुरूप परखा जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ये भारतीय परिस्थितियों में प्रभावी साबित हों.
सुरक्षा, लागत और नकली नोटों पर भी होगा असर
देश में हर साल बड़ी संख्या में पुराने और क्षतिग्रस्त नोटों को चलन से हटाना पड़ता है, जिससे छपाई और सुरक्षा पर भारी खर्च आता है. पिछले वर्षों में लाखों करोड़ रुपये मूल्य के खराब नोट वापस लिए जा चुके हैं और सुरक्षा फीचर्स पर भी हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं।
पॉलीमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे नकली नोट तैयार करना काफी मुश्किल हो जाता है. साथ ही इनकी लंबी उम्र के कारण बार-बार नए नोट छापने की जरूरत भी कम होगी, जिससे कुल लागत और पर्यावरणीय प्रभाव दोनों में कमी आने की संभावना है।
दुनिया के अनुभव के बाद भारत की बड़ी तैयारी
ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देशों में पॉलीमर नोट पहले से सफलतापूर्वक इस्तेमाल किए जा रहे हैं. रिपोर्ट्स बताती हैं कि इन देशों में ऐसे नोटों की उम्र कागजी नोटों के मुकाबले कई गुना अधिक रही है।
इसी अनुभव को देखते हुए आरबीआई की करेंसी प्रिंटिंग कंपनी BRBNMPL ने एडवांस्ड सिक्योरिटी फीचर्स वाली पॉलीमर सब्सट्रेट शीट के लिए वैश्विक टेंडर भी जारी किया है. यदि भारत में होने वाला परीक्षण सफल रहता है तो यह देश की करेंसी व्यवस्था में एक बड़ा तकनीकी बदलाव साबित हो सकता है, जिससे नोट अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और आधुनिक बनेंगे।
