CBSE : छठी क्लास के बच्चों के लिए टालें नीति- सुप्रीम कोर्ट :- सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से कहा है कि वह अगले साल छठी क्लास से शुरू होने वाले त्रिभाषा फॉर्मूले पर पुनर्विचार करे. इस फॉर्मूले में दो मूल भारतीय भाषाओं समेत तीन भाषाओं का अध्ययन छात्रों के लिए अनिवार्य बनाया गया है.CBSE की ओर से गुरुवार को कोर्ट में पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि वह इस सुझाव पर विचार करेंगे ।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी मोहना की बेंच इस मामले पर गुरुवार को सुनवाई कर रही थी. खंडपीठ ने कहा कि वह वर्ष 2027 से त्रिभाषा फॉर्मूले को अनिवार्य बनाने वाली नीति को लागू करने में देरी पर विचार करे।
जस्टिस बागची ने कहा कि अगर मौजूदा समय में कक्षा 6 में पढ़ रहे स्टूडेंट्स इस वर्ष से ही तीन भाषाएं पढ़ना चाहते हैं तो उन्हें इसकी मंजूरी दी जा सकती है. लेकिन व्यापक छात्रों के हित में CBSE को अगले साल से लागू होने वाली त्रिभाषा नीति को टालने पर विचार करना चाहिए।
खंडपीठ ने कहा कि इस नीति पर उसके सुझाव बिना किसी पूर्वाग्रह के हैं और असली मुद्दों पर बाद में फैसला लिया जा सकता है. कोर्ट के सुझाव पर एडिशनल सॉलिसिटर ने कहा कि वे इस मुद्दे पर विचार करेंगे और संस्था से चर्चा करके नया नोट लेकर जल्द ही वापस आएंगे।
बताते चलें कि CBSE ने इस साल सर्कुलर जारी करके त्रिभाषा नीति देशभर में लागू कर दी है. फिलहाल इस नीति में नौवीं क्लास के बच्चों को शामिल किया गया है. यह नीति इस साल 1 जुलाई से अमल में आ चुकी है. जबकि अगले साल यह नीति छठी क्लास से लागू होगी।
इस नीति को अनिवार्य बनाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसे अदालत ने 27 मई को सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया था. CBSE की त्रिभाषा नीति के तहत सभी स्टूडेंट्स को अब 3 भाषाएं पढ़नी होंगी. इनमें से 2 भाषाएं भारतीय मूल की होनी चाहिए. जबकि एक भाषा विदेशी ले सकते हैं।
