SanjayDutt : बॉक्स ऑफिस पर होगा ‘ग्रैंड कमबैक ’! :- बॉलीवुड के खलनायक यानी संजय दत्त का नाम जब भी सामने आता है तो एक ऐसे कलाकार की छवि उभरती है जिन्होंने अपने फिल्मी करियर से ज्यादा उतार चढ़ाव अपना पर्सनल लाइफ में देखे हैं. 66 साल की उम्र में भी आज जब वे बड़े पर्दे पर दिखाई देते हैं तो उनका वही पुराना अंदाज और चाल-ढाल देखकर लगता नहीं की वक्त बीता है. फिटनेस के मामले में तो संजय दत्त आज भी कई बड़े सितारों को टक्कर देते हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या अपनी इस दूसरी पारी में संजय दत्त सिर्फ एक कलाकार के तौर पर एक्टिव हैं या वे अपने किरदारों को लेकर अब पहले से ज्यादा संजीदा हो गए हैं?
पुरानी परंपरा के साथ नए संजू बाबा
हिंदी सिनेमा का इतिहास गवाह है कि जब भी किसी बड़े सुपरस्टार ने अपनी उम्र के दूसरे पड़ाव में कदम रखा है तो उन्होंने हमेशा अपनी भूमिकाएं बदली हैं. अमिताभ बच्चन, अनिल कपूर या आमिर खान सभी ने अपनी इमेज को री-इन्वेंट किया. संजय दत्त भी अब इसी राह पर निकल पड़े हैं. हाल ही में ‘धुरंधर’ और ‘राजा शिवाजी’ जैसी फिल्मों में उनके किरदारों ने दर्शकों का ध्यान खींचा है. खासकर अफजल खान के रोल में उनकी जो खूंखार झलक दिखी, उसने साफ कर दिया कि विलेन के रोल में भी वे आज के युवा एक्टर्स पर भारी पड़ते हैं।
‘आखिरी सवाल’ का विवादों से कनेक्शन
संजय दत्त की आने वाली फिल्म ‘आखिरी सवाल’ को लेकर गलियारों में काफी चर्चा है. ट्रेलर से संकेत मिलते हैं कि यह फिल्म एक गंभीर पॉलिटिकल ड्रामा है. इसमें 1975 के आपातकाल से लेकर 1992 के अयोध्या विवाद तक के पूरे वाक्ये को पिरोया गया है. फिल्म में संजू बाबा एक प्रोफेसर की भूमिका में हैं और उनके साथ मिथुन चक्रवर्ती के बेटे नमाशी चक्रवर्ती भी इस फिल्म में दिखेंगे. यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या संजू बाबा इस संजीदा किरदार के जरिए अपनी वही पुरानी कल्ट इमेज वापस ला पाएंगे?
सीक्वल का सहारा
संजय दत्त की लोकप्रियता का आलम यह है कि मेकर्स आज भी उनकी पुरानी हिट फिल्मों के सीक्वल बनाने की तैयारी में हैं. इसी कडी में ‘खलनायक’ के बल्लू बलराम की वापसी की आधिकारिक घोषणा हो चुकी है, वहीं ‘वास्तव’ के सीक्वल को लेकर भी चर्चाएं गर्म हैं. अगर पीछे मुड़कर देखें तो संजय का करियर किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रहा. 1981 में ‘रॉकी’ से आगाज, फिर ड्रग्स की समस्या, उसके बाद ‘नाम’ से जबरदस्त वापसी और फिर 1993 का वह कानूनी विवाद जिसने उनकी जिंदगी बदल दी. लेकिन जेल से रिहाई और वापसी के बीच उन्होंने ‘साजन’, ‘सड़क’ और ‘मुन्ना भाई’ जैसी ऐसी फिल्में दीं, जो आज भी हिंदी सिनेमा की धरोहर मानी जाती हैं।
