RamayanaStory : हनुमान जी ने यहाँ किया था कालनेमि राक्षस का वध :- उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के कादीपुर में स्थित बिजेथुआ महावीरन मंदिर दुनियाभर में लोकप्रिय है. इस मंदिर में हनुमान जी एक मूर्ति है, जिसका एक पैर जमीन में धंसा हुआ है.धार्मिक मान्यता के अनुसार, बिजेथुआ धाम का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है।
जब राक्षसों के बाण लगने से लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे, तब हनुमान जी उनके लिए संजीवनी बूटी लेने गए थे। उसी दौरान रावण ने हनुमान जी को रोकने के लिए राक्षस कालनेमि को भेजा था ताकि वह उन्हें रोक सके और लक्ष्मण जी को संजीवनी न मिल पाए। कालनेमि ने साधु का रूप धारण कर हनुमान जी को रोकने की कोशिश की लेकिन हनुमान जी समझ गए कि वह साधु नहीं बल्कि राक्षस है।
इसके बाद हनुमान जी ने कालनेमि का वध कर दिया। कहा जाता है कि कालनेमि के वध के बाद हनुमान जी जिस स्थान पर कुछ समय के लिए रुके थे, वही स्थान आज बिजेथुआ धाम के रूप में प्रसिद्ध है।
मंदिर के गर्भगृह में दर्शन के दौरान भक्त परिक्रमा करते हैं। यहां लोग अपनी मनोकामना पूरी होने के लिए घंटी बांधते हैं और इच्छा पूरी होने पर वापस आकर हनुमान पाठ करते हैं तथा श्रद्धा अनुसार दान देते हैं।
भगवान हनुमान ने राक्षस कालनेमि का वध किया था
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के कादीपुर स्थित बिजेथुआ महाबीरन वह स्थान है जहां कालिनेमि का वध किया गया था। यह वधस्थली आज पर्यटन केंद्र सहित तीर्थस्थल तीन तीर्थों का संगम है। यहां से प्रयाग, काशी और अयोध्या की समान दुरी है।
कालिनेमी का उल्लेख रामचरित मानस के लंका कांड, अध्यात्म रामायण के युद्ध कांड के सर्ग छः व सात में तथा आनंद रामायण के सर्ग 1 व 11 में मिलता है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस के लंका कांड के दोहा संख्या 55 से 58 तक में कालिनेमि का वर्णन किया है।
लक्ष्मण जब मेघनाद द्वारा चलाए गए शक्तिबाण से मूर्च्छित हो जाते हैं, तो हनुमान जी सुषेण वैध की सलाह पर धौलागिरी की ओर संजीवनी बूटी लाने के लिए प्रस्थान करते हैं। रावण द्वारा भेजा गया मुनि वेशधारी कालिनेमि राक्षस हनुमानजी का मार्ग अवरुद्ध करता है।
कालिनेमि रचित सरोवर आश्रम को देख हनुमानजी की जल पिने की इच्छा हुई। हनुमानजी के सरोवर में प्रवेश करते ही अभीशापित अप्सरा ने मकड़ी के रूप में, उनका पैर पकड़ लिया। मकड़ी ने कालिनेमि का रहस्य बताते हुए हनुमानजी से कहा, “मुनि ह होई यह निशिचर घोरा। मानहुं सत्य बचन कपि मोरा।।”
ऐसा कहकर मकड़ी लुप्त हो गई। तुलसी बाबा ने कालिनेमि के आश्रम के विषयों में नाम निर्देश तो नहीं किया है लेकिन परंपरागत जनश्रुति यही है कि बिजेथुआ महाबीरन ही वह पौराणिक स्थल है, जिसका संबंध कालिनेमि, हनुमानजी व मकड़ी से है। बताया जाता है कि यहां मकड़ी कुंड सरोवर, हनुमानजी का भव्य मंदिर तथा उसमें दक्षिणाभिमुख प्रतिमा पुराने जमाने से स्थित है।
