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Home » IndianMothers : मिलिए हिन्दुस्तान की बेस्ट मम्मीयों से !!
NARAD POST BREAKING NEWS

IndianMothers : मिलिए हिन्दुस्तान की बेस्ट मम्मीयों से !!

Prabhavati Devi was the pivot of a very cultured and disciplined family.
Narad PostBy Narad PostMay 22, 2026No Comments6 Mins Read
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IndianMothers
IndianMothers : मिलिए हिन्दुस्तान की बेस्ट मम्मीयों से !!
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1- जीजाबाई: छत्रपति शिवाजी महाराज की मां

IndianMothers : मिलिए हिन्दुस्तान की बेस्ट मम्मीयों से !!   : – जीजाबाई केवल मां नहीं थीं. वे एक महान संस्कार-निर्माता थीं. उन्होंने छोटे शिवाजी को रामायण और महाभारत की कथाएं सुनाईं. इन कथाओं से उनके मन में धर्म, न्याय और स्वाभिमान की भावना जागी. जीजाबाई ने उन्हें सिखाया कि राजसत्ता का अर्थ प्रजा की रक्षा है. वे चाहती थीं कि शिवाजी अन्याय के आगे कभी न झुकें. कठिन समय में भी उन्होंने धैर्य रखना सिखाया. उनके इन्हीं संस्कार ने शिवाजी को हिन्दवी स्वराज का महान नायक बनाया।

2- पुतलीबाई: महात्मा गांधी की मां

पुतलीबाई बहुत धार्मिक, संयमी और करुणामयी थीं. उनका जीवन सादा था. वे व्रत रखती थीं. प्रार्थना करती थीं. जरूरतमंदों की मदद करती थीं. छोटे मोहनदास गांधी अपनी मां को बहुत ध्यान से देखते थे।

उन्होंने सत्य, अहिंसा, धैर्य और आत्मसंयम का पहला पाठ घर में ही सीखा. पुतलीबाई का असर महात्मा गांधी पर इतना गहरा था कि आगे चलकर वही मूल्य उनके जीवन का आधार बने. दुनिया ने गांधी को महात्मा कहा, पर उस महात्मा की पहली पाठशाला उनकी मां थीं।

3- जयवंताबाई: महाराणा प्रताप की मां

जयवंताबाई ने अपने पुत्र प्रताप के मन में वीरता और मर्यादा का बीज डाला. वे राजघराने से थीं, पर उनका मन साहस और स्वाभिमान से भरा था. उन्होंने प्रताप को सिखाया कि सम्मान धन से बड़ा होता है।

सत्ता से बड़ा स्वाधीनता का मूल्य है. यही कारण था कि महाराणा प्रताप ने कठिन जीवन चुना, पर पराधीनता नहीं मानी. जंगल, पहाड़, घास की रोटी और संघर्ष भरा जीवन उन्होंने स्वीकार किया. ऐसी अडिग सोच के पीछे उनकी मां के संस्कार खड़े थे।

4- भुवनेश्वरी देवी: स्वामी विवेकानंद की मां

भुवनेश्वरी देवी बुद्धिमान, आत्मसम्मानी और दृढ़ स्वभाव की महिला थीं. उनके पुत्र नरेंद्रनाथ आगे चलकर स्वामी विवेकानंद बने. बचपन में नरेंद्र बहुत जिज्ञासु थे. वे प्रश्न पूछते थे. कभी शांत नहीं बैठते थे।

उनकी मां ने उन्हें डांटने के बजाय सही दिशा दी. वे उन्हें वीरता की कहानियां सुनातीं. करुणा और आत्म-सम्मान का महत्व भी समझाती थीं. विवेकानंद की तेज बुद्धि, निर्भीकता और ऊंचे विचारों में उनकी मां का गहरा योगदान था. उन्होंने बेटे को केवल पढ़ाया नहीं, भीतर से मजबूत बनाया।

5- विद्यावती: शहीद भगत सिंह की मां

विद्यावती का जीवन संघर्ष से भरा था. उनके परिवार में देशभक्ति का वातावरण था. छोटे भगत सिंह बचपन से ही अंग्रेजी शासन के अत्याचार सुनते थे. उनकी मां ने उन्हें डर नहीं सिखाया. उन्होंने अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की हिम्मत दी।

जब भगत सिंह बड़े हुए और क्रांति के रास्ते पर चले, तब एक मां का दिल जरूर कांपा होगा. पर, विद्यावती ने अपने बेटे के संकल्प को समझा. उन्होंने उसे रोका नहीं. भारत माता के लिए बेटे का बलिदान देने वाली यह मां आज भी अद्भुत साहस का प्रतीक है।

6- प्रभावती देवी: नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मां

प्रभावती देवी बड़े संस्कारी और अनुशासित परिवार की धुरी थीं. उनके पुत्र सुभाष बचपन से ही तेज, संवेदनशील और आत्मचिंतक थे. मां ने उनमें सेवा और अनुशासन की भावना जगाई. घर का वातावरण धार्मिक भी था और नैतिक भी. सुभाष ने बहुत छोटी उम्र से ही देश और समाज के बारे में सोचना शुरू कर दिया था।

आगे चलकर उन्होंने आराम का जीवन छोड़ दिया. देश की आजादी को अपना लक्ष्य बनाया. नेताजी की दृढ़ इच्छा, अनुशासन और त्याग की जड़ें उनके घर और विशेष रूप से उनकी मां के संस्कारों में थीं।

7- रामदुलारी देवी: लाल बहादुर शास्त्री की मां

रामदुलारी देवी ने बहुत कठिन जीवन जिया. जब लाल बहादुर छोटे थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया. घर में अभाव था. साधन कम थे. पर, मां ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने बेटे को ईमानदारी, सादगी और मेहनत की राह दिखाई. लालबहाुदर शास्त्री ने बचपन से गरीबी देखी, इसलिए उनमें विनम्रता आई. वे छोटे कद के थे, पर चरित्र में बहुत ऊंचे थे. जय जवान, जय किसान का नारा देने वाले देश के दूसरे प्रधानमंत्री की विनम्रता और सच्चाई की नींव उनकी मां ने रखी थी।

8- मूलमती: राम प्रसाद बिस्मिल की मां

मूलमती ने अपने पुत्र राम प्रसाद बिस्मिल को धार्मिकता, साहस और कर्तव्य का पाठ पढ़ाया. बिस्मिल बचपन से तेज और संवेदनशील थे. उनकी माँ ने उन्हें अच्छा साहित्य पढ़ने को प्रेरित किया।

उन्होंने चरित्र को सबसे बड़ी पूँजी बताया. जब बिस्मिल क्रांतिकारी बने, तब घर पर खतरा भी आया. पर, मूलमती ने कमजोरी नहीं दिखाई. कहा जाता है कि उन्होंने बेटे को देश के लिए अडिग रहने की प्रेरणा दी. फाँसी के सामने भी बिस्मिल का साहस अटल रहा. उस अटूट मन के पीछे मां की शक्ति थी।

9- माता त्रिप्ता: गुरुनानक देव की मां

माता त्रिप्ता का स्वभाव बहुत कोमल था. वे अपने पुत्र नानक के भीतर की अलग दुनिया को समझती थीं. नानक बचपन से ही शांत, विचारशील और दयालु थे. उन्हें सांसारिक दिखावा अच्छा नहीं लगता था।

ऐसे बच्चे को बहुत लोग अजीब समझ सकते थे, पर उनकी मां ने उन्हें प्रेम दिया. उनके मन की पवित्रता को पहचाना. गुरु नानक आगे चलकर प्रेम, समानता और सत्य का संदेश देने वाले महान संत बने. उनके भीतर की करुणा और मधुरता का एक स्रोत उनकी माँ का वात्सल्य भी था।

10- आर्याम्बा: आदि शंकराचार्य की मां

आर्याम्बा विदुषी और धर्मनिष्ठ महिला थीं. उनके पुत्र शंकर बचपन से ही असाधारण बुद्धि के थे. कहते हैं कि उन्होंने बहुत कम उम्र में ही शास्त्रों का ज्ञान पा लिया था. पिता के निधन के बाद मां ने ही उनका पालन किया. शंकर का मन वैराग्य की ओर था, पर एक मां के लिए यह आसान बात नहीं थी।

फिर भी आर्याम्बा ने बेटे की क्षमता को पहचाना. उन्होंने उसे रोका नहीं. आगे चलकर वही बालक आदि शंकराचार्य के रूप में पूरी दुनिया के सामने था. भारतीय दर्शन को नई शक्ति दी. इतनी महान साधना के पीछे मां का मौन त्याग खड़ा था।

इन माताओं की कहानियां हमें एक गहरी बात सिखाती है. महान व्यक्ति अचानक नहीं बनते. उनका निर्माण घर से शुरू होता है. मां की गोद ही पहला विद्यालय होती है।

उसके शब्द, उसका आचरण, उसका धैर्य और उसका विश्वास बच्चे का भविष्य बनाते हैं. जीजाबाई ने स्वराज का स्वप्न दिया. पुतलीबाई ने सत्य दिया. जयवंताबाई ने स्वाभिमान दिया. ऐसी माताएं भारत की असली शक्ति हैं. वे इतिहास के पन्नों में कम दिखती हैं, पर इतिहास बनाती हैं॥

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