KalyugPredictions : घोर कलयुग के लक्षण – घटेगी उम्र :- Kalyug Predictions: सनातन धर्म के कई ग्रंथों में कलयुग के अंतिम समय का विस्तृत वर्णन मिलता है. गरुड़ पुराण, विष्णु पुराण, भागवत पुराण और कल्कि पुराण में बताया गया है कि जैसे-जैसे कलयुग अपने अंत की ओर बढ़ेगा, वैसे-वैसे मनुष्यों के गुण, आयु, शारीरिक क्षमता और नैतिक मूल्य लगातार घटते जाएंगे. इन ग्रंथों के अनुसार, धर्म का आधार कमजोर हो जाएगा और अधर्म का प्रभाव बढ़ता जाएगा।
मनुष्यों की आयु और कद हो जाएगा बहुत कम
विष्णु पुराण और कल्कि पुराण में कहा गया है कि कलयुग के अंतिम चरण में मनुष्यों की आयु बहुत कम रह जाएगी. कुछ स्थानों पर मनुष्य की औसत आयु 20 से 30 वर्ष तक बताई गई है. शरीर का आकार भी वर्तमान की तुलना में छोटा हो जाएगा और लोगों की शारीरिक शक्ति कमजोर पड़ जाएगी।
धन ही बनेगा सम्मान का आधार
श्रीमद्भागवत महापुराण के 12वें स्कंध में कहा गया है कि कलयुग में धनवान व्यक्ति को ही श्रेष्ठ माना जाएगा. धर्म, ज्ञान और चरित्र की जगह पैसा और बाहरी दिखावा महत्व पाने लगेंगे. न्याय और सत्य का महत्व कम हो जाएगा और लोग स्वार्थ को प्राथमिकता देंगे।
परिवारों में बढ़ेगा कलह
गरुड़ पुराण और भागवत पुराण के अनुसार, कलयुग के अंतिम समय में परिवारों में प्रेम और विश्वास कम हो जाएगा. पति-पत्नी, माता-पिता और संतान के बीच संबंध कमजोर पड़ेंगे. लोग अपने स्वार्थ के लिए रिश्तों को भी पीछे छोड़ देंगे. भाई-भाई के बीच विवाद और समाज में वैमनस्य बढ़ेगा।
राजा और शासक जनता के हित से दूर हो जाएंगे
विष्णु पुराण में वर्णन मिलता है कि कलयुग के अंतिम समय में शासक प्रजा की रक्षा करने के बजाय अपने लाभ को अधिक महत्व देंगे. करों का बोझ बढ़ेगा और जनता परेशान रहेगी. धर्म और नीति के अनुसार शासन करने वाले राजा दुर्लभ हो जाएंगे।
अकाल का होगा प्रकोप
कल्कि पुराण में उल्लेख मिलता है कि पृथ्वी पर सूखा, अकाल और प्राकृतिक असंतुलन बढ़ेगा. समय पर वर्षा नहीं होगी और अन्न की कमी देखने को मिलेगी. लोगों का जीवन कठिन होता जाएगा और समाज में अशांति बढ़ेगी।
कलयुग के संकेत
गीताप्रेस के महाभारत में वर्णित एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण ने पांडवों को कलयुग के कुछ संकेत बताए थे. युधिष्ठिर ने दो सूंड वाले हाथी का दृश्य देखा, जिसका अर्थ यह बताया गया कि भविष्य में ऐसे लोग होंगे जो एक ही समय में दो प्रकार की बातें करेंगे और उनके कथन तथा आचरण में अंतर होगा।
भीम ने ऐसी गाय देखी जो अपने बछड़े को इतना चाट रही थी कि उसका शरीर घायल होने लगा. श्रीकृष्ण ने इसका अर्थ समझाते हुए कहा कि कलयुग में माता-पिता का मोह इतना बढ़ जाएगा कि वह संतान के दोषों को भी नजरअंदाज करने लगेंगे।
अर्जुन ने ऐसे पक्षी को देखा जिसके पंखों पर वेदों के मंत्र थे, लेकिन वह मृत शरीर का मांस खा रहा था. इसका अर्थ यह बताया गया कि भविष्य में कुछ लोग धार्मिक ज्ञान का प्रदर्शन तो करेंगे, लेकिन उनका आचरण उसके अनुरूप नहीं होगा।
धर्म का केवल एक चौथाई भाग रहेगा
भागवत पुराण के अनुसार, सत्य, दया, तप और पवित्रता धर्म के चार स्तंभ माने गए हैं. कलियुग में धीरे-धीरे ये स्तंभ कमजोर होते जाएंगे और अंत में धर्म का केवल एक भाग ही शेष रहेगा. यही कारण है कि कलियुग को संघर्ष और भ्रम का युग कहा गया है।
भगवान कल्कि के अवतार का भी है उल्लेख
कल्कि पुराण के अनुसार, जब अधर्म अत्यधिक बढ़ जाएगा और समाज में अराजकता फैल जाएगी, तब भगवान विष्णु का कल्कि अवतार प्रकट होगा. उनका जन्म शंभल ग्राम में विष्णुयश नामक ब्राह्मण के घर बताया गया है. इसके बाद अधर्म का नाश होगा और फिर से सत्ययुग की शुरुआत होगी।
आध्यात्मिक साधना को बताया गया समाधान
पुराणों में यह भी कहा गया है कि कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण, भक्ति, सत्संग और अच्छे कर्म सबसे बड़ा सहारा होंगे. श्रीमद्भागवत महापुराण में बताया गया है कि अन्य युगों की तुलना में कलियुग में नाम-स्मरण और भक्ति के माध्यम से मोक्ष प्राप्त करना अपेक्षाकृत सरल माना गया है।
