StatueSymbolism : चौक-चौराहों पर लगी घोड़े की मूर्तियां खोलती हैं कई राज :- आपने कभी न कभी ट्रैवलिंग के दौरान या किसी काम से घर से बाहर निकलने पर किसी चौराहे से गुजरते समय वहां किसी महान योद्धा की मूर्ति देखी होगी।
आपने गौर किया होगा कि इन मूर्तियों में घोड़े अलग-अलग स्टाइल में खड़े होते हैं। ऐसे में ये देखने के बाद आपके दिमाग में कभी न कभी यह सवाल जरूर आया होगा कि आखिर ये सब अलग-अलग क्यों होते हैं? आपको जानकर हैरानी होगी कि घोड़े के पैरों की ये पोजीशन कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह एक तरह का सीक्रेट मैसेज है। इसके जरिए आप यह पता लगा सकते हैं कि उस वीर योद्धा की मौत कैसे हुई थी। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
घोड़े के दोनों आगे वाले पैर हवा में
अगर आप किसी ऐसी मूर्ति को देखते हैं जिसमें घोड़े के आगे के दोनों पैर हवा में उठे हुए हैं, तो इसका मतलब बहुत साफ है वह योद्धा जंग के मैदान में ही शहीद हुआ था। यानी उस वीर की जान लड़ाई लड़ते हुए दुश्मनों के बीच गई थी। यह पोजीशन उनकी बहादुरी और युद्ध में मिली शहादत को सलाम करने का एक तरीका है।
घोड़े का एक पैर हवा में
अगर घोड़े का सिर्फ एक पैर हवा में है और बाकी तीन पैर जमीन पर टिके हैं, तो इसका मतलब है कि योद्धा की मौत जंग में लगे जख्मों की वजह से हुई थी।
यानी वह लड़ाई के दौरान बुरी तरह घायल तो हुआ था, लेकिन उसकी मौत तुरंत मैदान में नहीं हुई। जंग में लगी चोटों के कारण इलाज के दौरान या कुछ समय बाद उनकी जान गई।
चारों पैर जमीन पर
अगर मूर्ति में घोड़ा अपने चारों पैरों पर बिल्कुल सीधा और नॉर्मल खड़ा है, तो इसका इशारा यह है कि योद्धा की मौत कुदरती तरीके से हुई थी।
इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उन्होंने लड़ाइयां नहीं लड़ीं, बल्कि इसका मतलब यह है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में कई जंग तो लड़ीं, लेकिन उनकी मौत किसी घाव या चोट से नहीं बल्कि बढ़ती उम्र या किसी बीमारी की वजह से हुई।
