JournalismHistory : जानें आखिर देव ऋषि नारद को क्यों कहा जाता है सबसे पहला पत्रकार? :- हिंदू धर्मग्रंथों में एक ऐसा पात्र है जो न केवल देवताओं, बल्कि असुरों और मनुष्यों के बीच भी समान रूप से पूजनीय है वे हैं देवर्षि नारद। ‘नारायण-नारायण’ के जप और हाथ में वीणा लिए नारद मुनि को अक्सर हम इधर की उधर करने वाले पात्र के रूप में देखते हैं, लेकिन वास्तव में वे सूचना तंत्र के सबसे बड़े स्तंभ थे।
ब्रह्मा जी के मानस पुत्र और भगवान विष्णु के परम भक्त नारद मुनि को सृष्टि का पहला पत्रकार माना जाता है। आइए जानते हैं उनके जीवन के उन पहलुओं को जो उन्हें एक कुशल संचारक, संगीतज्ञ और त्रिकालदर्शी मुनि बनाते हैं।
देवर्षि नारद को ‘आदि पत्रकार’ की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि वे संचार के सिद्धांतों के प्रतिपादक थे। आज के पत्रकारों की तरह वे तीनों लोकों, देवलोक, मृत्युलोक और पाताल लोक के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान करते थे।
उनकी विशेषता यह थी कि वे केवल खबर नहीं पहुंचाते थे, बल्कि उस खबर के माध्यम से अधर्म का नाश और धर्म की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करते थे।
वे ब्रह्मांड के पहले ऐसे संवाददाता थे, जिनके पास अबाध गति का विशेषाधिकार था, यानी उन्हें कहीं भी आने-जाने से कोई नहीं रोक सकता था।
नारद मुनि केवल एक संदेशवाहक नहीं, बल्कि एक उच्च कोटि के विद्वान थे। महाभारत के सभापर्व के अनुसार, वे उपनिषदों, व्याकरण, ज्योतिष और आयुर्वेद के प्रकांड पंडित थे।
वे संगीत के भी जनक माने जाते हैं। उनके हाथ में रहने वाली ‘महती’ वीणा मात्र एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक है। माना जाता है कि माता सरस्वती के सानिध्य में उन्होंने संगीत की बारीकियां सीखी थीं। उनकी वीणा की हर तान भगवान विष्णु की भक्ति को समर्पित होती है।
