VaishnoDeviScandal : कहां बनते हैं वैष्णो देवी मंदिर में चढ़ने वाले चांदी के सिक्के :- माता वैष्णो देवी मंदिर के चढ़ावे में नकली सिक्के मिलने का खुलासा हुआ है. सिक्कों में मात्र 5 से 6 फीसदी ही चांदी मिली है. जांच में पाया गया कि चांदी के नाम पर मंदिर में चढ़ाए गए सिक्कों में लोहा और कैडमियम मिला. कैडमियम वो धातु है जो कैंसर की वजह बन सकती है. अब सवाल है कि वैष्णो देवी मंदिर में चढ़ावा कैसे कंट्रोल होता है? यहां चढ़ाए जाने वाले सिक्के कहां बनते हैं? चांदी और सिक्कों के जांच की जिम्मेदारी किसकी है?
चांदी और सिक्कों के जांच की जिम्मेदारी किसकी है ?
माता वैष्णो देवी देश का एक बड़ा तीर्थ है. बोर्ड की वेबसाइट के मुताबिक इस साल अब तक यहां 27.50 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन को पहुंच चुके हैं. आने वाले श्रद्धालु माता के दरबार में अपनी क्षमता के मुताबिक चढ़ावा चढ़ाते हैं. दान पात्र में कोई नकद जमा करता है. कोई सोना चढ़ाता है. कई लोग चांदी के सिक्के और गहने भी चढ़ाते हैं. भक्त मानते हैं कि उनका चढ़ावा सीधे माता तक पहुंचता है. यही भरोसा इस धाम की ताकत है. इसलिए चढ़ावे की व्यवस्था बहुत अहम हो जाती है ।
वैष्णो देवी मंदिर का प्रबंधन श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड करता है. यह बोर्ड साल 1986 से काम कर रहा है. यही यात्रा, सुरक्षा और दान की व्यवस्था संभालता है. मंदिर में जो भी चढ़ावा आता है, वह अंत में बोर्ड के नियंत्रण में जाता है. दान पेटियों से लेकर बड़े चढ़ावे तक सब रिकॉर्ड किया जाता है. फिर उसे सुरक्षित रखने की प्रक्रिया होती है. कीमती धातुओं को अलग से संभालकर रखा जाता है. इस बार जो चांदी टकसाल भेजी गई, उसका वजन 20 टन बताया गया है. ऐसा पहली बार हुआ है जब बोर्ड ने टकसाल को चांदी भेजा था।
चांदी या चांदी के सिक्के कहां से आते हैं ?
इसका सपाट जवाब है कि ये सिक्के और चांदी, दोनों श्रद्धालु ही माता के चरणों में अर्पित करते हैं. ये सिक्के भक्तगण अपने साथ लेकर आते हैं. कुछ कटरा पहुंचने पर खरीदते हैं. कुछ मंदिर परिसर में मौजूद दुकानों से खरीदते हैं. फिर उसे चढ़ावे में दे देते हैं. वर्तमान घपले के सामने आने के बाद ऐसा माना जा रहा है कि खुले बाजार से खरीदी गई चांदी एवं सिक्के में सबसे ज्यादा गड़बड़ी है. क्योंकि हर दुकान विश्वसनीय हो, यह जरूरी नहीं है।
इस मामले का एक खतरनाक पहलू कैडमियम है. यह एक सस्ती धातु है. दिखने में चांदी जैसी लगती है, इसलिए धोखा आसान होता है. कैडमियम स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. इसे गर्म करने पर जहरीला धुआं निकलता है. यह फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है. किडनी पर असर डाल सकता है।
लंबे समय में कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है. पता चला है कि टकसाल कर्मचारियों को इसे गलाने में दिक्कत आई. उन्हें सुरक्षा उपकरण लगाने पड़े. इससे साफ है कि मामला गंभीर है।
वैष्णो देवी सिर्फ एक मंदिर नहीं है. यह करोड़ों लोगों की आस्था है. यहां चढ़ाया गया हर सिक्का भावनाओं से जुड़ा होता है. तय यह भी है कि कोई भी भक्त जानबूझकर मिलावटी या नकली चांदी नहीं चढ़ाएगा।
यह सिर्फ आर्थिक घोटाला नहीं है. भक्तों के भरोसे पर चोट है. अब जरूरत है पारदर्शिता की. सख्त जांच की. और ऐसी व्यवस्था की, जिससे श्रद्धालु निश्चिंत होकर चढ़ावा दे सकें. आस्था को सुरक्षित रखना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. यह काम सरकारी तंत्र को ही करना होगा।
