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Home » विधवा के दर्द ने खोली सिस्टम की पोल उत्तराखंड का मामला
उत्तराखंड

विधवा के दर्द ने खोली सिस्टम की पोल उत्तराखंड का मामला

The widow's pain exposed the system's reality, Uttarakhand's case
Sponsored By: Ananya SahgalMarch 26, 2025No Comments3 Mins Read
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विधवा के दर्द ने खोली सिस्टम की पोल उत्तराखंड का मामला
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विधवा के दर्द ने खोली सिस्टम की पोल उत्तराखंड का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सराकार को फटकार लगाई है. एक डॉक्टर की विधवा को 9 सालों तक मुआवजा नहीं देने के लिए कोर्ट ने नाराजगी जताई. महिला साल 2016 में अपने पति की मौत के बाद से मुआवजे के लिए मुकदमा लड़ रही है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने उत्तराखंड (Uttarakhand) सरकार से कहा कि डॉक्टर का परिवार नौ सालों से मुआवजे के लिए मुकदमा लड़ने के लिए मजबूर है इसलिए अब इन सालों के इंटरेस्ट के साथ उन्हें मुआवजा दिया जाए.

कोर्ट ने पीड़ित परिवार को 1 कराेड़ देने का आदेश दिया है. कोर्ट ने यह आदेश राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया है. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में डाॅक्टर के परिवार को 1.99 करोड़ रुपये देने का आदेश को चुनौती दी थी.महिला के पति की साल 2016 में कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में ड्यूटी के दौरान मौत हो गई थी. 20 अप्रैल, 2016 को डाॅक्टर को जसपुर के कम्युनिटी हेल्थ केयर में ड्यूटी के दौरान कुछ हमलावरों ने गोली मार दी थी. उस वक्त की तत्कालीन सरकार ने परिवार के लिए 50 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की थी, जो अब तक नहीं मिला है.

पीड़ित परिवार का कहना है कि अगर 2016 में ही 50 लाख रुपये अनुग्रह राशि के तौर पर दे दिए गए होते तो नौ साल तक उन्हें मुकदमा लड़ने की जरूरत नहीं थी. इस मामले की सुनवाई जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच राज्य सरकार की स्पेशल लीव पेटीशन पर कर रही थी, जो उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल की गई.

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने साल 2018 में राज्य सरकार को पीड़ित परिवार को 1.99 करोड़े रुपये के मुआवजे का निर्देश दिया था. कोर्ट ने याचिका दाखिल किए जाने से फैसला सुनाए जाने तक 7.5 पर्सेंट सालाना ब्याज के साथ विधवा को 1.99 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया था. इसके अलावा हाईकोर्ट ने राज्य के मेडिकेयर सर्विस पर्संस एंड इंस्टीटूयशन एक्ट, 2013 के प्रवधानों को लागू करने और परिवार को अतिरिक्त पेंशन लाभ देने के लिए भी कहा था.

जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच ने कहा कि राज्य सरकार के चीफ सेक्रेटरी की ओर से 50 लाख रुपये के मुआवजे का प्रस्ताव दिए जाने और मुख्यमंत्री की ओर से उसे अप्रूव किए जाने के बाद भी पीड़ित परिवार को राशि नहीं दी गई, जबकि उनसे कहा गया कि अप्रूवल नहीं मिला है. इस मामले में याचिकाकर्ता का कहना है कि अब तक सिर्फ एक लाख रुपये अनुग्रह राशि के तौर पर परिवार को दिए गए. कोर्ट ने कहा कि यह देखते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया जाता है कि वह नौ सालों के इंटरेस्ट के साथ परिवार को यह राशि देगी, जो कुल एक करोड़ रुपये बनती है.

उत्तराखंड सरकार ने कोर्ट को बताया कि परिवार को 11 लाख रुपये पहले ही दिए जा चुके हैं. उन्होंने बताया कि साल 2021 के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर परिवार को छुट्टियों का पैसा, ग्रैचुटी, जीपीएफ, फैमिली पेंशन और जीआईएस दिया गया, जबकि उनके बेटे को हेल्थ डिपार्टमेंट में जूनियर असिस्टेंट के तौर पर नियुक्ति भी दी गई. इस दलील के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 1 करोड़ रुपये में से 11 लाख हटाकर मुआवजा राशि 89 लाख रुपये कर दी है.

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